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Sunday, August 24, 2008

राग दीपक उवाच


पूर्णिमा की रात में चाँद बदल जाते हैं !

वक्त के साथ वफादार बदल जाते हैं !!

सोचता हूँ तेरी याद में वक्त बरबाद ना करूँ !

पर सोचते सोचते कमबख्त विचार बदल जाते हैं !!

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एक बदसूरत खातून से एक लफंगा बोला ! क्या बोला ?

लफंगा बोला : कुछ उधार चाहिए ! मिलेगा क्या ?

टालने के लिए खातून बोली - नही मेरे पास कुछ नही है !

लफंगे ने नया दांव खेला, और बोला, अरे तुम चाँद हो !

कुछ भी कैसे नही होगा चाँद के पास ? असंभव है ये !

कहते हैं खातून ने कलेजा निकाल के दे दिया इस लफंगे को !