
पूर्णिमा की रात में चाँद बदल जाते हैं !
वक्त के साथ वफादार बदल जाते हैं !!
सोचता हूँ तेरी याद में वक्त बरबाद ना करूँ !
पर सोचते सोचते कमबख्त विचार बदल जाते हैं !!
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एक बदसूरत खातून से एक लफंगा बोला ! क्या बोला ?
लफंगा बोला : कुछ उधार चाहिए ! मिलेगा क्या ?
टालने के लिए खातून बोली - नही मेरे पास कुछ नही है !
लफंगे ने नया दांव खेला, और बोला, अरे तुम चाँद हो !
कुछ भी कैसे नही होगा चाँद के पास ? असंभव है ये !
कहते हैं खातून ने कलेजा निकाल के दे दिया इस लफंगे को !