Monday, April 6, 2009

सावधान : ताऊ और ताई की याददास्त गुम..

हम सभी को सावधान कर देना चाहते हैं की आज कल ताऊ की याददाश्त कमजोर पड़ चुकी है और जिनसे उधार ले रक्खा है, वो याददाश्त तो पुरी तरह बेकार हो चुकी है। निचे का वाक़या आप पढ़ लीजिये और ख़ुद फैसला कर लीजिये।

ताऊ और ताई को आजकल ऐसा महसूस होने लगा है की उनकी याददास्त कमजोर हो चली है। इसके लिए उन्होंने डाक्टर से चेक अप करवाने का फैसला किया और रामप्यारी को साथ लेकर एक् डाक्टर के पास पहुंच गए.

डॉक्टर ने बड़ी बारीकी से उनका परीक्षण किया और बताया कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है। बुढ़ापे में इस तरह के लक्षण स्वाभाविक हैं। कोई फ़िकर करने जैसी बात नहीं है.

इस पर ताऊ बोला की अजी दागदर जी हमको तो कुछ भी याद नहीं रहता. और रामप्यारी ने भी हां मे हां मिलाई. वैसे रामप्यारी को इस भूलने वाली बीमारी से बडा फ़ायदा था. क्योंकि वो जब भी सामान लाने जाती तब बाकी पैसों की चाकलेट खा जाती थी और भूलने की वजह से ताऊ या ताई उसको पकड नही पाते थे. वो जो भी हिसाब बतादे वो सही.


खैर डाक्टर ने उनको कहा कि महत्वपूर्ण कार्यों को लिखकर रख लें जिससे कोई जरूरी काम न भूलें।

ताऊ और ताई ने डॉक्टर का धन्यवाद किया. अब डाक्टर ने कहा - मेरी फ़ीस के पांच सौ रुपये दिजिये.
अब ताऊ बोला - किस बात के रुपये?
डाक्टर बोला - मैने आपकी जांच की है, उस बात की फ़ीस.
ताऊ बोला - जी डाक्दर साब मन्नै तो बेरा कोनी? याद आवैगी तो भिजवा दूंगा.
और वो तीनो घर चले गये. उस रात को टीवी देखते समय ताऊ उठकर कहीं जाने लगा तो ताई ने पूछा - ''कहां जा रहे हो ?''
ताऊ ने जवाब दिया - ''रसोईघर में'.
ताई बोली - ''मेरे लिये एक कप चाय लेते आना''
ताऊ बोला - ''ठीक है, ले आऊंगा।''
इस पर ताई बोली - ''मेरे खयाल से तुम इसे नोट कर लो नहीं तो भूल जाओगे।''
ताऊ बोला - ''नहीं भूलूंगा, तुम चिंता मत करो.
अब ताई बोली - ''ठीक है, मेरे लिये कुछ खाने को भी लेते आना।
ताऊ बोला - के लाऊं तेरे खाने के लिये?
ताई बोली - मेरा तो आज व्रत है ज्यादा कुछ नही थोडी सी आलू चिप्स ही लेते आना.'
ताऊ - ठीक है , ले आऊंगा।''
अब ताई फ़िर बोली - ''मुझे लगता है तुम लिख लेते तो ठीक था। कहीं भूल न जाओ।''
अब ताऊ नाराज सा होकर बोला - अरे भागवान नही भूलूंगा । मुझे तुम्हारे लिये एक कप चाय और आलू चिप्स ही तो लानी है ना?ठीक है इतना तो मैं याद रख ही सकता हूं। ''


लगभग आधे घण्टे बाद ताऊ एक कटोरे में आइसक्रीम और एक प्लेट में मठरी लेकर आया।
ताई ने यह देखते ही आग बबूला होकर मेड-इन-जर्मन लठ्ठ ऊठाया और चिल्लाई - ''तुमसे कहा था ना कि लिखकर ले जाओ वरना भूल जाओगे। बताओ मेरे आलू के परांठे कहां है ?''


और रामप्यारी ताई को लठ्ठ ऊठाते देख कर पहले ही वहां से खिसक ली. और ताऊ का हालचाल तो आप लोग फ़ोन कार्के पूछ लेना. बिल्कुल ताजा किस्सा है ये. ऐसी हालत मे ताऊ आपसे उधार लेकर भूल गया तो हमको दोष मत दिजियेगा.हमने आपको पहले ही सावधान कर दिया है.

Sunday, December 14, 2008

यह क्या है ?

अभी चुनाव के व्यस्त कार्यक्रम से फ़ुरसत हुये ही थे कि मेरे मित्र भाटि साहब की बहन कुछ ज्यादा बीमार हो गई ! कुछ पेट के कैन्सर से पीडित हैं ! 

इधर कुछ समय उनको भी देना पडता है ! कल रात को दस बजे के करीब उनके घर पर ही था ! बहन जी की उम्र करीब ६० साल की है ! और मेरे मित्र के साथ ही रहती हैं ! 

मेरे मित्र के घर मे इस बहन के अलावा एक उनका बडा भाई भी है ! ये तीनो भाई बहन कुंआरे हैं ! उम्र भी ५० से लेकर ६० के बीच मे है तीनो की !

रात को बहन की तबियत ज्यादा खराब हुई तो डाक्टर को बुलवाया ! डाक्टर ने आकर देखा ...ब्लड प्रेशर..नब्ज गायब ...! उनको पलन्ग से नीचे उतार लिया गया... घर मे कुछ रिश्तेदार महिलाए भी आई हुई थी ..रोना धोना मच गया..!

यहां तक तो ठीक.... अब बहन जी  के  बहुत ही लाडले पडोसी के १५ वर्षिय बालक को मालूम पडा उसी वक्त वो आकर चिल्लाया--आन्टी जी .. क्या हुआ आपको ?

और आप आश्चर्य करेंगे आन्टी जी ऊठकर बैठ गई ! और आज वो और दिनो की अपेक्षा ज्यादा स्वस्थ लग रही हैं ! ये कल रात की घटना है !




 

Thursday, November 20, 2008

ताई ने किया अर्थ का अनर्थ

बात पुरानी है ! उस समय ताऊ और ताई की शादी हुई ही थी ! 
शादी के कुछ दिन बाद ताऊ तो कलकता चला गया ! 
और ताई रह गई गाँव  में ! अब एक दिन ताई ने एक पत्र ताऊ को लिखा ! 


आप तो ताऊ को जानते ही हो ! ताऊ ख़ुद अंगूठा छाप है ! इसीलिए चोरी 
डकैती और लूट्मारी के धंधो में लगा है ! 
सूना है आजकल चाँद बेच कर खाने की जुगाड़ में है ! 
यमराज जी चाँद ताऊ के हवाले कर गए हैं !  


ताऊ अब ऐसा है तो ताई भी उससे दो हाथ आगे है ! 
बस किसी तरह जोड़ कर  अक्षर लिख लेती है ! 
शब्द कहाँ लगाना, कोमा,  पूर्णविराम जहाँ इच्छा हो वहीं लगाती है ! 
आप भी ताई का पत्र ताऊ के नाम की झलक देखिये !


मेरे प्रिय जीवन साथी मेरे चरणों में आपका प्रणाम ! 

आपने अभी तक चिट्ठी नही लिखी मेरी सहेली को !  

नौकरी मिल गई है गाय ने !  

बच्छडा दिया है दादाजी ने !  

शराब शुरू करदी मैंने !  

तुमको बहुत ख़त लिखे पर तुम नही आए कुत्ते के बच्चे !  

भेडिया खा गई दो महीने का राशन !  

छुट्टी पर आते वक्त ले आना एक खूबसूरत औरत !  

मेरी सहेली बन गई है ! 

और इस वक्त टी.वी. पर गाना गा रही है हमारी बकरी !  

बेच दी गई है तुम्हारी माँ !  

तुमको याद कर रही है एक पडोसन !  

हमें बहुत तंग करती है तुम्हारी बहन !  

सिरदर्द से लेटी है तुम्हारी पत्नी !
 

अब अगर ताई पढी लिखी होती और सही कोमा एवं पूर्णविराम लगाती तो असल बात यह थी ! 


मेरे प्रिय जीवन साथी के चरणों में मेरा प्रणाम  ! 
आपने अभी तक चिट्ठी नही लिखी ! मेरी सहेली को  नौकरी मिल गई है !  
गाय ने  बच्छडा दिया है !  दादाजी ने शराब शुरू करदी !  
मैंने  तुमको बहुत ख़त लिखे पर तुम नही आए ! कुत्ते के बच्चे  भेडिया खा गई !  
दो महीने का राशन  छुट्टी पर आते वक्त ले आना !  
एक खूबसूरत औरत  मेरी सहेली बन गई है ! 
और इस वक्त टी.वी. पर गाना गा रही है ! हमारी बकरी  बेच दी गई है !  
तुम्हारी माँ  तुमको याद कर रही है !  एक पडोसन  हमें बहुत तंग करती है !  
तुम्हारी बहन  सिरदर्द से लेटी है ! 

तुम्हारी पत्नी !
 

हम बिल्कुल भी नही बताएँगे की ये कौन से ताई और ताऊ की कहानी है ! 
आपको जो समझना हो आप समझ लीजिये ! 

Saturday, November 15, 2008

तीन सिद्ध ताऊ : गहन तपस्या में लीन

साथियो, मित्रो, भाईयो ,बहनों और सारे वोटरों को तिवारीसाहब का नमस्कार ! 
हमको अफ़सोस इस बात का है की हमको उपरोक्त भाषण देने का सौभाग्य इस बार नही मिला ! कारण हमारी पार्टी ने हमें टिकट देने के काबिल ही नही समझा !  फ़िर भी हमारी व्यस्तताए वैसी ही हैं जैसी की ख़ुद चुनाव लड़ने में होती है ! कारण की पार्टी का काम करना पड़ता है ! हमारी व्यस्तताए अभी बहुत ज्यादा हैं ! और १०/११ दिन की बात है फ़िर आपसे जमकर बात चित होगी ! 

अब यहाँ आगये हैं तो कुछ गप शप हो जाए तो अच्छा रहेगा ! 

एक बार ताऊ २५ वीं मंजिल पर बैठा था ! एक मित्र ने बताया की आपकी पोती  का एक्सीडेंट हो गया है तो ताऊ हडबडी में खिड़की से छलांग लगा देते हैं ! २० मंजिल तक नीचे गिरे तो याद आया की उनके तो कोई पोती ही नही है ! फ़िर दसवीं  मंजिल तक आते  आते उनको याद आया की  उनकी तो अभी तक शादी ही नही हुई ! और जब जमीन पर गिर कर उनकी हड्डी पसली एक हो गई तब याद आया की उनका नाम तो ताऊ ही नही था ! अब ये आप अंदाज लगाओ की इनमे ये दोनों ताऊ कौन कौन थे ? हम नही बताएँगे !


उपरोक्त घटना के बाद ताऊ रामपुरिया , राज भाटिया जी और योगीन्द्र मोदगिल  जी यानी तीनो हरयाणवी अपने घरो से लड़ झगड़ कर तपस्या करने हिमालय के पहाडो  में चले गए ! अब आप जानते ही हो की तपस्या और ताउओ का क्या सम्बन्ध ? तो कुछ घर की याद आने लग गई ! उस जंगल में रास्ता भी मुश्किल सो वापस भी नही जा सकते थे !
 
 
राज भाटिया जी और योगीन्द्र मोदगिल जी  ज्यादा परेशान थे वापस घर जाने के लिए ! और ताऊ रामपुरिया को तो मुंह मांगी मुराद मिल गई थी ! वो जंगल में बहुत प्रशन्न था ! कारण एक तो ताई से लट्ठ खाने का डर खत्म और सुल्फे गांजे चिलम का पक्का इंतजाम वहाँ था ही  ! सो वो किसी कीमत पर वापस नही जाना चाहता था ! तो इनके दो गुट बन गए थे !
 

एक दिन इनकी तपस्या से भगवान् भोलेनाथ प्रशन्न होके प्रकट हो गए !

और उनसे बोले - वत्स वरदान मांगो ! 
भाटिया जी बोले - भोले नाथ , मुझे कुछ नही चाहिए बस मेरे बीबी बच्चो के पास मुझे वापस भेज दो !  
भोलेनाथ - तथास्तु ! और भाटिया जी जर्मनी पहुँच गए !
योगीन्द्र मोदगिल जी ने भी यही वरदान माँगा और उनको भी भोले नाथ ने पानीपत भेज दिया ! 

अब ताऊ रामपुरिया सोचने लगा की मैं क्या करूँ ? अब अकेला कैसे रहूंगा ? 
और घर वापस गया तो ताई मारेगी लट्ठ से ! इस तरह संन्यास लेकर घर लौटने से जग हंसाई होगी सो अलग ! बड़ी परेशानी में फंस लिया ताऊ तो ! 

अब भोले नाथ बोले - ताऊ फ़टाफ़ट मांग वरदान ! हमारे पास समय बहुत कम है ! 
ताऊ - भोले नाथ जी आप तो वरदान स्वरुप राज भाटिया जी और योगीन्द्र मोदगिल जी को वापस युहीं बुलवा दो ! 

और भोले नाथ - तथास्तु कह कर अंतर्धान हो गए ! और इब फ़िर से तीनो ताऊ उसी गुफा में तपस्या कर रहे हैं ! आपको भी इनसे कुछ काम हो तो इन तीनो सिद्ध पुरुषों का पता हमारे पास है ! आप को भी अवश्य लाभ होगा ! आख़िर सिद्ध ताऊ हैं तीनो ! अब बस संसार के दुःख कष्ट मिटाने का ही कार्य करते हैं ! 



Wednesday, October 29, 2008

ताऊ का नया जूता

आप सभी को दीपावली की शुभकामनाएं ! हम आपको व्यक्तिगत रूप से आकर दीपावली की शुभकामनाएं नही दे सके ! क्योंकि हमारी पन्डताइन  की तबियत ठीक नही थी ! सो हम आप लोगो से दूर रहे ! और इसके लिए हम आप से क्षमा चाहते हैं ! आइये आपको एक बिल्कुल ताजा किस्सा सुनाता हूँ ! 

कल दीपावली मिलने या कहिये साल भर के पापो का प्रायश्चित करने ताऊ रामपुरिया  के घर गए थे ! वहाँ जाकर मिठाई विठाई खा पीके वापस आने लगे तो बिजली गुल हो गई ! तो ताऊ उठकर खड़े हो गए और टॉर्च लेके हमारे आगे २ हो लिए ! 

हमने कहा - ताऊ रास्ता हमारा रोज का देखा हुवा है हम चले जायेंगे ! आप कहाँ कष्ट करेंगे ?

इस बात पर ताऊ कहने लगे - यार तिवारी साहब , मैंने कोई आपको रास्ता दिखाने के लिए टॉर्च थोड़ी उठाई है ? अरे टॉर्च तो मैंने इस लिए उठाई है की आप कहीं अंधेरे में आपके  पुराने जूते छोड़ कर मेरे नए जूते नही पहन कर निकल लो ! 

 

Tuesday, October 21, 2008

शक्ल ही नही आदत भी बहुत मिलती है ताई से !


ताऊ अपने घर पर जाकर गप्पे मार रहा था की आफिस में मेरे नीचे ४० आदमी काम करते हैं ! तो ताई ने पूछा - फ़िर तो तुम बहुत बड़े अफसर होगे ? अब ताऊ बोला - नही नही वो बात नही है ! असल में मेरा आफिस ऊपर की मंजिल पर है और मेरे नीचे की मंजिल पर जो आफिस है उसमे ४० आदमी काम करते हैं ! इस बात पर ताई को गुस्सा आगया ! और उसने ताऊ का गला पकड़ कर कहा - अब काम धंधा शुरू कर दो नही तो तुम्हारी खैर नही है ! बहुत दिन हो गए उल्टे सीधे धंधे करते हुए !  कोई सलीके का काम करो ! और दो लट्ठ ताऊ पर बजा दिए !

अब ताऊ को बड़ी चिंता लगी की अब क्या काम करे ! ताऊ की पहचान कुछ ज्यादा ही थी सो ताऊ को क्रिकेट टीम की कप्तानी मिल गई ! शर्त ये थी बोर्ड वालो की - मैच जिताओगे तो ही अगले मैच की कप्तानी मिलेगी !   अब इससे ज्यादा अच्छा धंधा और क्या मिलता ? मैच जिताने की जिम्मेदारी ताऊ की ! ताऊ बोर्ड से बोला - आप चिंता ही मत करो ! हमको कप्तान बना दिया तो मैच जीता ही समझो !  रोहतक के स्टेडियम में मैच शुरू होने वाला था ! ताऊ एम्पायर के पास गया टोस के पहले और बोला - एम्पायर साब , वैसे तो आप आदमी इमानदार लगते हैं फ़िर भी मैं आपसे हमारे हक़ में इमानदार होने की अपेक्षा रखता हूँ ! वैसे ये उतार दिशा  में स्टेडियम से लगी इमारत है वो असपताल है और दक्षिण में जो नदी बह रही है वो बहुत ही गहरी है ! इसमे डूबने के बाद कोई बचता नही है ! और इस मैदान में मेरी टीम कभी कोई मैच आज तक  हारी नही है आगे आप समझ दार हो ! ताऊ की धमकी काम कर गई और एम्पायर ने मैच ताऊ की टीम को जिता  दिया ! 

चारो तरफ़ ताऊ की जय जयकार होने लगी ! और अगले मैच के लिए ताऊ उसकी टीम के साथ मुम्बई जाने के लिए हवाई जहाज में सवार हो लिया ! जैसे ही हवाई जहाज में चढ़ा , सामने खडी एयर होस्टेस ने ताऊ को मुस्कराकर नमस्ते किया ! जवाब में ताऊ ने मुस्करा कर  नमस्ते का जवाब देकर कहा - तुम्हारी शक्ल मेरी बीबी से बहुत मिलती है ! अब एयर होस्टेस को गुस्सा आगया और ताऊ को एक जोरदार तमाचा जड़ दिया !  ताऊ गाल सहलाते सहलाते बोला - शक्ल ही नही आदत भी बहुत मिलती है ताई से  ! 



 


Friday, October 17, 2008

ताऊ के कारनामे

बहुत साल पहले की बात है ! ताऊ को उन दिनों में वर्त्तमान ताई से प्यार हो गया था ! ताऊ बड़ी हिम्मत करके  ताई के पिताजी के पास पहुंचा ! और बोला- मैं तुम्हारी लड़की का हाथ माँगने आया हूँ ! लड़की के पिता जी ने ताऊ को बड़े प्रेम से बैठाया और जाकर एक लट्ठ ले कर आगया ! और ताऊ को खूब लठ्ठों से धो दिया ! 

बाद में ताऊ का एक बड़ा भाई था भाटिया जी ! उन्होंने ताई के पिताजी से बात कर के दोनों की शादी करवा दी ! 

एक रात घनघोर पानी बरस रहा था, बिजली कड़क रही थी ! ताऊ भीगता भागता हलवाई की दूकान पर पहुंचा !
हलवाई ने पूछा - ताऊ तुम शादी शुदा दिखते हो ?

ताऊ नाराज होकर जोर से बोला- अरे बावली बूच कहीं के ! ये भी कोई पूछने की बात है ? जाहिर है इस तूफानी 
रात में मैं मेरी मां के कहने से तो रस-मलाई लेने नही आता !