तिवारी साहब पन्डताइन को लिवाने ससुराल गए थे !
वहाँ इस बार बड़ा आनंद दायक माहौल था ! और
वहां पर शेरो शायरी का कुछ अच्छा माहौल जम गया था !
आप भी तिवारी साहब की वहा पर सुनी सुनाई चवन्नी
छाप शायरी की दो चवन्नियों का लुत्फ़ उठाइये !
पहली चवन्नी :-
मैं सूंघ लेता अगर तुम खुशबू होती !
जवाब देता अगर तुम सवाल होती !
सब जानते हैं की मैं कभी पीता नही ?
फ़िर भी पी लेता अगर तुम शराब होती !
दूसरी चवन्नी :-
वो पास रहते तो हम बात कर लेते !
वो यहीं रहते तो हम प्यार कर लेते !
क्या परेशानियां रही, जो वो चले गए ?
कारण तो बताते, हम इंतजार कर लेते !
पुनश्च:-
( हमारे जाने के बाद ताउजी ने हमारे बारे में
बहुत उलटा सीधा लिखा है ! और सुना है ताऊ
आजकल कटोरा फेंक कर, बैंक के बाहर, भुट्टे
मूंगफली सेक कर बेच रहे है ! ठीक है वो चाहे
जो लिख सकते हैं तो "तिवारी साहब" भी अगली
पोस्ट में इसका जवाब देंगे !
तब तक " तिवारी साहब"की सलाम लीजिये )
नाखुश - हिंदी ग़ज़ल
3 weeks ago